बिहार ग्राम रक्षा दल
ग्राम रक्षा दल स्वार्थहीन करते है काम, मगर कोई पहचान नहीं है। मिले हमें भी अपना हक, दिखता ऐसा अहसान नहीं है। हमें जब से जोड़ा गया है, रिश्ते भी कितने तोड़ा गया है। जोड़ नूतन रिश्तों की आस में- अपनों से भी मुँह मोड़ा गया है। उषा काल सुबह का हो या, पहर चौथी ही क्यों न बीते। विधि व्यवस्था के संधारन हो या कहर कोरोना क्यों न बीते। हम भी सुरक्षा के अंग है, ये बात किसी को न सुझे। अवाज हमारी सत्ता तक पहुँचे, हमें भी भुखमरी से बचा ले। सुरक्षा की इस श्रृंखला में, हमें भी तो अब सजा ले। न्याय उचित कर कुछ तो कर दे, अपना समझकर साथ रख ले। बिन हमारी कुछ तो फर्क पड़ेगा? मान लो वर्ना हटाकर देख ले। श्रवण कुमार पंडित(टेढ़ागाछ,बिहार )